Pitashay Ki Pathri ka aauvadik ilaj

पित्ताशय हमारे शरीर का एक छोटा सा अंग होता है जो लीवर के न‍िचले सतह से जुडी रहने वाली, नाशपाती के आकार की 10 सेमी लम्‍बी व 3 से 5 सेमी चौडी एक थैली होती है ज‍िसे प‍ित्‍ताशय व प‍ित्‍त की थैली कहते है । इसका कार्य पित्त को संग्रहित करना तथा भोजन के बाद पित्त नली के माध्यम से छोटी आंत में पित्त का स्त्राव करना है। पित्त रस वसा के अवशोषण में मदद करता है। प‍ित्‍त की थैली में दो तरह की द‍िक्‍कतें पैदा हो सकती है एक प‍‍ित्‍ताशय का फूलना या इन्फ्लेमेशन (INFLAMATION),‍ ज‍िसे कोलीस्‍टास‍िस (CHOLESTASIS) कहते है और दूसरी प‍ित्‍त पत्थरी (GALLBLADDER STONE) के नाम से जाना जाता है । जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिल रुबिन की मात्रा बढ़ जाती हैं तो पत्थरी निर्माण के लिए एक आदर्श स्थिति बन जाती हैं।

  Pitashay Ki Pathri


 पथरी बनने के मुख्य कारण

- समय पर ख्राना न खाने से थैली लंबे समय तक भरी रहती है और पाचक रस का पित्त की थैली में जमाव शुरू हो जाता है, जो धीरे- धीरे पथरी का रूप ले लेता है।
- इंफेक्शन की वजह से पाचक रस गाढ़े हो जाते हैं और कालांतर में पथरी का रूप ले लेते हैं।
-पित्त में कोलेस्टेरॉल की मात्रा अधिक होने से मोटापे से ग्रस्त होने वाली महिलाओं में पित्त की पथरी होने की
संभावना अधिक होती है।

Pitashay Ki Pathri ka aauvadik ilaj 

आयुर्वेद के अनुसार, सभी तीन दोष वात, पित्त और कफ पिल्लेस्टोन के गठन में भूमिका निभाते हैं। पिटा की अत्यधिक वृद्धि (गर्म, मसालेदार भोजन, शराब आदि की वजह से) पत्थर के गठन का आधार बनाता है। फैफ़ी की वृद्धि होते ही , भारी खाद्य पदार्थ पित के साथ मिलकर और बहुत चिपचिपा मिश्रण पैदा करती है. वात इस मिश्रण को सूखता है और इसे एक पत्थर के आकार में बना देता है.

बचाव के उपायः-

प‍ित्‍ताशय की थोड़ी सी भी गड़बड़ी होने पर खानपान को सही रखना बेहद जरूरी होता है । प‍ित्‍ताशय में यद‍ि बहुत अध‍िक सोज (सूजन) है तो मरीज को दो या तीन द‍िन तक उपवास करना चाह‍िए । जब तक वह समस्‍या खत्‍म न हो जाए । इस समय स‍िर्फ पानी (उबालकर ठण्‍डा क‍िया हुआ) ,चकोतरा, नींबू, सन्‍तरा, अंगूर, गाजर, चुकन्‍दर का जूस व मूली का जूस पीना चाहीए । दही, कॅाटेज चीज़ और एक चम्‍मच अॉल‍िव आॅयल (जैतून तेल) भी द‍िन में दो बार लें , इन्‍द्रजौ म‍िठा 10 ग्राम और हरी ईलाइची 10 ग्राम एक सफेद सूती कपड़े में पोटली बनाकर पीने वाले पानी ( लगभग 4 लीटर) में डाल के रखें ,जब भी प्‍यास लगें तो उसी पानी को प‍ियें, यह रोज़ करें तथा हर 5 द‍िन बाद पोटली बदल लेवें।

पित्त की थैली की पथरी का साइज अधिक बड़ा हो जाने से फिर केवल आपरेशन कराने का रास्ता ही बचता है । गुर्दे की पथरी चाहे जितनी बड़ी हो गयी हो आपरेशन कराने से बचना चाहिये और पथरी का इलाज होम्योपैथिक अथवा आयुर्वेदिक तरीके से कराना चाहिये ।

यहाँ भी देखे   Pitt ki Pathri ka Desi ilaj


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